स्वामी विवेकानंद केवल एक संत नहीं थे, बल्कि वे युवाओं के आत्मविश्वास, राष्ट्रनिर्माण और चरित्र निर्माण के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत थे। उनका मानना था कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है।
उन्होंने कहा था—
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
यह वाक्य आज भी हर युवा के भीतर छिपी शक्ति को जगाने का कार्य करता है।
विवेकानंद जी चाहते थे कि युवा केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि
मजबूत चरित्र वाले हों
आत्मनिर्भर हों
देश और समाज के लिए सोचने वाले हों
राष्ट्रीय युवा दिवस हमें याद दिलाता है कि अगर युवा सही दिशा में सोचें और कर्म करें, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।
आज के दिन संकल्प लें—
✔ अपने आत्मविश्वास को पहचानेंगे
✔ नकारात्मक सोच से दूर रहेंगे
✔ राष्ट्र और समाज के लिए कुछ अच्छा करेंगे
यही स्वामी विवेकानंद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।