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20 साल बाद गृहयुद्ध,नरसंहार,हत्या,बलात्कार और विभाजन...

1 意见· 23/01/26
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डेमोग्राफी का खतरनाक खेल
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भारत में मुस्लिम आबादी 35%++ हैं और ज्यादातर मदरसे में पढ़े हैं इसलिए 20 साल बाद गृहयुद्ध,नरसंहार,हत्या,बलात्कार और विभाजन निश्चित है।
लव जिहाद,लैंड जिहाद,ड्रग जिहाद,घुसपैठ जिहाद,धर्मांतरण जिहाद,जनसंख्या जिहाद-ये सब भारत की डेमोग्राफी को तेजी से बदल रहें हैं।यदि कठोर कानून तत्काल लागू नहीं किया गया तो 20 वर्ष बाद या तो कन्वर्ट होना पड़ेगा।जैसे यश चोपड़ा, प्रेम चोपड़ा,सुनील दत्त,देवानंद,राज कपूर,राजेन्द्र कुमार, गुलजार,मनमोहन सिंह,खुशवंत सिंह,मिल्खा सिंह,इंद्र कुमार गुजराल,राम जेठमलानी और लालकृष्ण आडवाणी जी की तरह मकान,दुकान,खेत,खलिहान,उद्योग,व्यापार आदि सब छोड़ कर भागना होगा।
यदि विकास करने से देश सुरक्षित होता तो विकास के मामले में फ्रांस और स्विट्जरलैंड हमसे बहुत अधिक आगे है।
वर्ष 1805 में अफगानिस्तान के प्रधानमंत्री पंडित नंदराम टिक्कू ने बहुत विकास किया था और 10 साल बाद उन्हें खदेड़ दिया गया और आज वहां एक भी हिंदू,जैन,बौद्ध,सिख नहीं बचा।
यदि मठ-मंदिर गुरुद्वारा बनाने से हिंदू,जैन,बौद्ध,सिख सुरक्षित होते तो अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बांग्लादेश में हज़ारों मठ- मंदिर और गुरुद्वारे थे मगर जनसंख्या बढ़ी और सभी का नामोनिशान मिटा दिया गया।
यदि गौशाला,धर्मशाला,गुरुकुल बनाने से हिंदू,जैन,बौद्ध,सिख सुरक्षित होते तो अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बांग्लादेश में भी हजारों गौशाला,धर्मशाला और गुरुकुल थे जो जनसंख्या बढ़ते ही जमीन में दफन कर दिए गए।
यदि कथा,पूजा,दान,हवन,ध्यान,साधना करने से हिंदू,जैन, बौद्ध,सिख सुरक्षित होते तो अफगानिस्तान,पाकिस्तान, बांग्लादेश में हिंदू,जैन,बौद्ध,सिख का नामोनिशान नहीं मिटता।
100 वर्ष पहले विश्व की सबसे बड़ी भगवान बुद्ध की मूर्ति अफगानिस्तान में थी लेकिन अब वहां न मूर्ति बची है और न बौद्ध।
100 वर्ष पहले विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर मुल्तान में था लेकिन अब वहां मदरसा चलता है और न तो भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति है और न तो कोई जैन।
100 वर्ष पहले विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर गांधार (अफगानिस्तान) में था लेकिन अब उसका नामोनिशान तक नहीं है।न तो शिवलिंग बचा है और न ही शिवभक्त।
100 वर्ष पहले विश्व का सबसे बड़ा विष्णु मंदिर कैकेय (पाकिस्तान) में था लेकिन अब उसका नामोनिशान तक नहीं है। न तो भगवान विष्णु की मूर्ति बची है और न ही विष्णु भक्त।
वर्ष 1971 में बांग्लादेश को बनवाने के लिए हमारे 20 हज़ार सैनिकों ने बलिदान दिया था लेकिन आज वहां से हिंदू,जैन, बौद्ध,सिख को अपना मकान, दुकान, खेत, खलिहान, उद्योग, व्यापार छोड़कर भागना पड़ रहा है।
वर्ष 1990 में कश्मीर से हिंदुओं को अपना मकान,दुकान, खेत,खलिहान,उद्योग,व्यापार सब छोड़ कर भागना पड़ा और आज तक उन्हें अपनी संपत्ति तक वापस नहीं मिली।
नेता कर क्या रहें हैं?
वोटजीवी,नोटजीवी और सत्ताजीवी नेता प्रतिदिन आरोप- प्रत्यारोप,तू-तू-मैं-मैं,नूरा-कुश्ती,बतोलेबाजी,भाषणबाजी और तू चोर मैं सिपाही करते हैं लेकिन जब बात आवश्यक मुद्दों पर आती है तो संसद में सभी राजनेता चुप्पी साध लेते हैं।
हिन्दुओं यदि अपना मकान,दुकान,खेत,खलिहान,उद्योग, व्यापार और त्योहार बचाना चाहते हैं तो दल की गुलामी छोड़ो औरअपने क्षेत्र के सांसद से मिल कर लव जिहाद,लैंड जिहाद, ड्रग जिहाद,घुसपैठ जिहाद,धर्मांतरण जिहाद और जनसंख्या जिहाद रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की मांग करिए।
हिन्दुओं यदि अपने बच्चों को सुरक्षित देखना चाहते हैं तो नेताओं की जय जयकार करने की बजाय अपने सांसद से मिल कर समान शिक्षा,समान नागरिक संहिता (UCC),समान कर संहिता,समान व्यापार संहिता,समान जनसंख्या संहिता, समान पुलिस संहिता, समान न्याय संहिता, समान प्रशासनिक संहिता लागू करने की मांग करिए।
याद रखें आज के नेता 20 वर्ष बाद आपका मकान,दुकान, खेत, खलिहान, उद्योग, व्यापार और त्योहार बचाने नहीं आएंगे लेकिन आज का कठोर कानून ही आपका धन,धर्म और परिवार को बचाएगा।
दो रास्ते चुनें चीन जैसा कठोर कानून (कोई जिहाद नहीं) और इजरायल जैसा शक्ति का उपयोग (दुश्मन को कुचल दो)
अंतिम चेतावनी-अपने बच्चों को सुरक्षित देखना है,अपना घर- दुकान-त्योहार बचाना है तो जय जयकार बंद करो और अपने क्षेत्र के सांसद के पास जाओ।कानून बनवाओ।

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