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“आपदा में ही भगवान क्यों याद आते हैं? | माता कुंती की हिला देने वाली स्तुति | श्रीमद्भागवत 1.8”

1 Visninger· 07/02/26
AcharyaSamsherSinghYadav
AcharyaSamsherSinghYadav
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कुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हो चुका था।
धर्म की विजय हुई थी, लेकिन पांडवों के हृदय में उल्लास नहीं—केवल वेदना, वैराग्य और भक्ति थी।
इसी करुणामय वातावरण में आता है श्रीमद्भागवत महापुराण का प्रथम स्कंध – अष्टम अध्याय,
जहाँ माता कुंती भगवान श्रीकृष्ण के सामने ऐसी प्रार्थना करती हैं,
जो आज भी हृदय को झकझोर देती है।
इस दिव्य कथा में आप जानेंगे—
🔹 अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से गर्भस्थ परीक्षित की रक्षा कैसे हुई
🔹 युद्ध के बाद भी पांडव क्यों रो रहे थे
🔹 माता कुंती भगवान से सुख नहीं, आपदाएँ क्यों माँगती हैं
🔹 “विपदाः सन्तु ताः शश्वत्” का गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य
🔹 निष्काम भक्ति क्या होती है और कुंती उसमें सर्वोच्च क्यों हैं
यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं,
👉 जीवन को समझने और जीने के लिए है।
यदि आपके जीवन में दुःख है, संकट है, या मन अशांत है—
तो यह भागवत कथा आपको कृष्ण से जोड़ देगी।
🙏 इस दिव्य कथा को अंत तक अवश्य सुनें
🙏 भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम
जय श्रीकृष्ण | राधे राधे

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