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“अधूरी नींद” – एक प्रेरणादायक कहानी #motivationalstory

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रात के लगभग साढ़े बारह बज रहे थे। शहर की चमकती लाइटें धीरे-धीरे बुझ रही थीं, लेकिन एक छोटी-सी किराये की कोठरी की खिड़की से अब भी हल्की रोशनी बाहर आ रही थी। उस कमरे में बैठा था विनय—एक 22 वर्षीय लड़का, जो पढ़ाई के साथ-साथ होटल में बर्तन धोने का काम करता था।
दिन भर की थकान उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी, आंखें लाल थीं, हाथों में साबुन से पपड़ी पड़ी थी। लेकिन उसके सामने खुली थी एक पुरानी, फटी-सी किताब—“सफलता की राह”।
विनय का सपना था—सरकारी नौकरी पाना। लेकिन हालात ऐसे थे कि वह पूरे दिन मेहनत करता और रात को सिर्फ दो घंटे पढ़ पाता। बहुत लोग उसे कहते—
“इतनी थकान के बाद पढ़ाई? कब तक ऐसे चलेगा?”
पर विनय के पास एक ही जवाब था—
“जब तक मंज़िल मुस्कुरा कर न कह दे—शाबाश बेटा!”
उस रात भी वह पढ़ ही रहा था कि उसके रूममेट मनीष ने पूछा,
“यार, सो नहीं जाता? कल सुबह फिर 6 बजे होटल जाना है।”
विनय हल्के से मुस्कुराया, “अधूरी नींद तो पूरी हो जाएगी… पर अधूरे सपने कैसे पूरे होंगे?”

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