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शरशय्या पर भीष्म और साक्षात श्रीकृष्ण!
मृत्यु से पहले जो देखा, वही बना मोक्ष | श्रीमद्भागवत 1.9

1 Pogledi· 07/02/26
AcharyaSamsherSinghYadav
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क्या मृत्यु भी मोक्ष बन सकती है?
क्या भगवान का क्रोध भी भक्त के लिए वरदान हो सकता है?
श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध के नवम अध्याय में हमें मिलती है
एक ऐसी दिव्य कथा—
जो जीवन, धर्म, भक्ति और मृत्यु—चारों का अंतिम सत्य प्रकट करती है।
कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद,
शरशय्या पर पड़े भीष्म पितामह,
साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करते हैं।
वह दृश्य केवल नेत्रों का नहीं,
आत्मा का अनुभव है।
इस कथा में जानिए—
🔹 भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का रहस्य
🔹 भगवान श्रीकृष्ण का भक्त-वत्सल स्वरूप
🔹 अर्जुन के सारथी बने भगवान का वह क्रोध
🔹 राजधर्म, दानधर्म और मोक्ष का उपदेश
🔹 मृत्यु के समय भगवान का स्मरण क्यों है सबसे बड़ा साधन
यह कथा हमें सिखाती है—
👉 पूरी ज़िंदगी कैसी भी हो,
यदि अंत श्रीकृष्ण में है—तो मोक्ष निश्चित है।
📿 यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं,
जीवन को दिशा देने के लिए है।
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