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पिता - ज्ञानरंजन #कहानी Pita - gyanranjan #kahani #Text #Book

2 ビュー· 22/12/25
Deepakrajmanuj
Deepakrajmanuj
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ज्ञानरंजन अपनी कहानी ‘पिता’ में पिता-पुत्र संबंधों के यथार्थ को अपनी पूर्ववर्ती कहानियों की तुलना में काफी अलग ढंग से प्रस्तुत करते हैं। पुत्र उमस भरी गर्म रात में घर लौटा, उसने आध पल को बिस्तर का अंदाजा लेने के लिए बिजली जलाई। बिस्तर फर्श पर ही पड़े थे। पत्नी ने सिर्फ इतना कहा कि ‘आ गये’ और बच्चे की तरफ करवट लेकर चुप हो गयी।

वातावरण बहुत गर्म है। गर्मी की वजह से कपड़े पसीने में पूरी तरह से भीग चुके हैं। घर में सभी लोग सो चुके है घर के भीतर सिर्फ वही जागा है। घर में अगर पुत्र जागा है तो बाहर पिता भी जागे हुए हैं। रोती बिल्ली को देख पिता सचेत हो गये और उन्होंने डंडे की आवाज़ से बिल्ली को भगा दिया। जब वह घूम फिर कर लौट रहा था तब भी उसने कनखी से पिता को गंजी से अपनी पीठ खुजाते देखा था। लेकिन वह पिता से बचकर घर में घुस गया। पहले उसे लगा कि पिता को गर्मी की वजह से शायद नींद नहीं आ रही लेकिन फिर एकाएक उसका मन रोष से भर गया क्योंकि घर के सभी लोग पिता से पंखे के नीचे सोने के लिये कहा करते हैं लेकिन पिता हैं कि सुनते ही नहीं।

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