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🤷जब एक बेटे को घर में "सब कुछ" मानकर पाला जाता है और उसे कभी गलतियों पर नहीं टोका जाता, तो वही लड़का बड़ा होकर एक अहंकारी पति का रूप ले लेता है।👍
सीखने का माहौल: एक बच्चा अपने पिता को अपनी माँ के साथ जैसा व्यवहार करते देखता है, वह अनजाने में उसी व्यवहार को अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में भी अपना लेता है।
बदलाव की गुंजाइश: यह समझना ज़रूरी है कि "परमेश्वर" जैसा दर्जा पाने के लिए व्यवहार में भी वैसी ही शालीनता और प्रेम होना चाहिए। गलत परवरिश को सही समझ और आत्म-चिंतन से बदला जा सकता है।
निष्कर्ष: पति का दर्जा ऊँचा ज़रूर है, लेकिन उस पद की गरिमा तभी बनी रहती है जब परवरिश में "अधिकार" के साथ-साथ "सम्मान और जिम्मेदारी" भी सिखाई गई हो।
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