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सांवलिया सेठ, जिन्हें श्री सांवरिया सेठ जी या श्याम सेठ के नाम से भी जाना जाता है, भगवान श्री कृष्ण का ही एक रूप हैं। उनका मुख्य और भव्य मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गांव में स्थित है।
मुख्य विवरण
भगवान का स्वरूप: मंदिर के गर्भगृह में भगवान कृष्ण की काले पत्थर की बनी मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति चतुर्भुज विष्णु के स्वरूप में है, जिनके चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म (कमल) हैं।
ऐतिहासिक मान्यता: किंवदंतियों के अनुसार, जब मुगल काल में मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, तब संत दयाराम जी ने इन मूर्तियों को एक वटवृक्ष के नीचे जमीन में छिपा दिया था। लगभग 1840 में, भोलाराम गुर्जर नामक एक ग्वाले को सपने में इन मूर्तियों का पता चला और बाद में खुदाई करने पर ये मूर्तियां मिलीं।
मीराबाई से संबंध: माना जाता है कि सांवलिया सेठ, मीराबाई के वही 'गिरधर गोपाल' हैं, जिनकी वह बचपन से पूजा करती थीं।
व्यापारियों में ख्याति: भक्तों, विशेषकर व्यापारियों के बीच, सांवलिया सेठ की बहुत ख्याति है। कई लोग उन्हें अपना "बिजनेस पार्टनर" मानते हैं और व्यापार में सफलता या अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अपनी कमाई का एक हिस्सा यहां अर्पित करते हैं। इसी कारण मंदिर के भंडार में अकूत धनराशि और आभूषण प्राप्त होते हैं।
मंदिर की वास्तुकला: वर्तमान मंदिर गुलाबी बलुआ पत्थर से बना एक भव्य और सुंदर परिसर है। इसकी वास्तुकला प्राचीन हिंदू मंदिरों से प्रेरित है, जिसमें दीवारों और खंभों पर सुंदर नक्काशी की गई है।
सांवलिया सेठ का मंदिर आस्था, चमत्कार और समृद्धि का एक बड़ा केंद्र है, जहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होने का विश्वास है।
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सांवरिया सेठ भगवान कृष्ण का ही एक रूप हैं, जो विशेष रूप से अपने बाल रूप में पूजे जाते हैं और राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गाँव में स्थित मंदिर के लिए प्रसिद्ध हैं; उन्हें 'श्याम सेठ' भी कहते हैं और भक्त उन्हें धन, समृद्धि और सफलता के देवता के रूप में पूजते हैं, जो व्यापारियों के बीच 'बिजनेस पार्टनर' भी कहलाते हैं। उनकी मूर्ति का रंग काला होता है, जिससे यह नाम पड़ा, और यह माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
मुख्य बातें:
पहचान: भगवान कृष्ण का बाल रूप, 'श्याम' (सांवला) रंग।
स्थान: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया गाँव में भव्य मंदिर।
महत्व: धन, व्यापार और मनोकामना पूर्ति के देवता; भक्त उन्हें 'बिजनेस पार्टनर' मानते हैं।
मान्यता: सच्चे भक्तों की हर प्रार्थना यहाँ पूरी होती है, खासकर जन्माष्टमी पर।
ऐतिहासिक जुड़ाव: मीराबाई के 'गिरधर गोपाल' से जुड़ाव माना जाता है, जिनकी मूर्तियाँ खुदाई से मिली थीं।
सांवरिया सेठ की विशेषताएँ:
नाम का अर्थ: 'सांवरिया' भगवान कृष्ण के सांवले रंग से और 'सेठ' धन व समृद्धि के प्रतीक के रूप में जुड़ा है।
भक्तों की श्रद्धा: दूर-दूर से भक्त दर्शन करने आते हैं


