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Quần short
यह पावन भजन प्रभु श्री जगन्नाथ जी की महिमा, करुणा और अनंत प्रेम को समर्पित है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपने मन, वाणी और आत्मा को प्रभु के चरणों में अर्पित करता है।
जगन्नाथ स्वामी सभी दुखों को हरने वाले, भक्तों पर कृपा बरसाने वाले और जीवन को सच्ची दिशा देने वाले हैं।
इस भजन को सुनकर मन को शांति, हृदय को भक्ति और आत्मा को आनंद की अनुभूति होती है।
प्रभु जगन्नाथ जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे।
जय जगन्नाथ | जय बलभद्र | जय सुभद्रा माई 🌸
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Bhagavad Gita Adhyay 1 Shlok 2📜🙏
दुर्योधन पांडव सेना की व्यूह-रचना देख कर द्रोणाचार्य के पास गए. जान्ने के लिए देखिये गीता अध्याय 1 श्लोक 2 का सार.
Sanskrit Shlok:
सञ्जय उवाच
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा ।
आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥ २ ॥
अर्थ:
संजय ने कहा: हे राजन! उस समय राजा दुर्योधन ने व्यूह-रचना से खड़ी पांडवो की सेना को देखकर, द्रोणाचार्य के पास जाकर ये वचन कहे।
गीता अध्याय 1 श्लोक 2, श्रीमद्भगवद गीता, दुर्योधन, द्रोणाचार्य, कुरूक्षेत्र युद्ध, हिंदी गीता व्याख्या।



