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वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार (Main Door) के लिए 32 पदों (विभाजनों) में से सही पद का चयन करना सुख-समृद्धि के लिए आवश्यक है। सबसे शुभ पद उत्तर में M3-M4 (सोमा/भल्लाट), पूर्व में E3-E4 (जयंत/इंद्र), दक्षिण में S3-S4 (विताथा/गृहक्षत), और पश्चिम में W5-W6 (सुग्रीव/पुष्पदंत) माने जाते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा, धन और स्वास्थ्य लाते हैं।
दिशा और पद के अनुसार शुभ स्थान:
उत्तर (North): सबसे उत्तम। उत्तर-पूर्व की ओर (N3-N4) से लेकर केंद्र तक। इसमें सोमा (कुबेर स्थान) और भल्लाट (धन) पद आते हैं।
पूर्व (East): दूसरा सबसे अच्छा। उत्तर-पूर्व से पूर्व की दिशा में (जयंत और इंद्र पद)।
पश्चिम (West): पश्चिम दिशा के केंद्र के पास, विशेषकर सुग्रीव और पुष्पदंत पद।
दक्षिण (South): दक्षिण-पूर्व के पास, विताथा पद भी कुछ मामलों में शुभ माना जाता है, लेकिन अन्य दिशाओं को प्राथमिकता दी जाती है।
मुख्य द्वार के लिए वास्तु टिप्स:
आकार: मुख्य द्वार अन्य दरवाजों से बड़ा और मजबूत होना चाहिए।
खुलने की दिशा: दरवाजा दक्षिणावर्त (clockwise) अंदर की ओर खुलना चाहिए।
साफ-सफाई: द्वार के सामने गंदगी, कूड़ादान या खंभा नहीं होना चाहिए।
प्रकाश: प्रवेश द्वार पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए, जो सकारात्मकता लाती है।
वर्जित पद:
मुख्य द्वार को बिल्कुल कोने (NE, NW, SE, SW) में बनाने से बचना चाहिए।
E8 (आकाश पद): यह पद आर्थिक नुकसान और चोरी का कारण बन सकता है।
ध्यान दें: यदि घर के बाहर कोई रास्ता या पैसेज है, तभी ये पद सही ढंग से काम करते हैं।




