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Title, thumbnail ya video me agar abusing, adult ya sexually explicit content paya gaya to channel bina kisi warning ke permanent delete kar diya jayega. Yeh rule turant lagu hai. Ab tak 350+ channels delete kiye ja chuke hain. Kripya kisi bhi prakar ka adult ya abusive content upload na karein. Rule violate hone par channel bina bataye delete ho jayega.


— Team ApnaTube

كليبو خلق

growth apnatube #tags

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sad song

ankit

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मीरा हमेशा से अपने छोटे से कस्बे की सबसे हँसमुख लड़की मानी जाती थी। उसके चेहरे की मुस्कान मानो किसी भी उदासी को हराने की ताकत रखती थी। लोग कहते थे, “मीरा की मुस्कान में जादू है।”
लेकिन एक दिन वो जादू जैसे कहीं खो गया…

मीरा की दुनिया उसकी माँ थी। वही उसकी सहेली, उसका सहारा, उसका सब कुछ। माँ अपने हाथों से उसके लिए चूड़ियाँ चुनती, सुबह उसके बाल बनाती और रात को कहानियाँ सुनाती। पर बीमारी ने माँ को धीरे-धीरे कमजोर कर दिया। मीरा रात-रात भर माँ के पास बैठी रहती, आँसू पोंछकर कहती—
“माँ, आप ठीक हो जाओगी ना? हम फिर मेला चलेंगे ना?”
माँ बस हल्की सी मुस्कान देकर उसका हाथ पकड़ लेती।

एक सुबह अस्पताल के कमरे में चुप्पी थी। नर्सों की भागदौड़ थी, डॉक्टरों की निगाहों में निराशा थी। मीरा ने माँ का चेहरा देखा… पर इस बार माँ की मुस्कान बिल्कुल शांत थी—और स्थिर। मीरा ने जितना जोर से हो सकता था रोकर माँ को हिलाया, पर वो वापस नहीं लौटी।

wolf

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🙏 doston main apna tube channel ko subscribe subscribe aur like aur jarur karna thank you on watching the video

manoj pawar

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thank for watching my video plaesa follw my channek

As official

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राजपूत पिता और पुत्री की तलवारबाजी के इस शौर्यपूर्ण दृश्य पर 10 पंक्तियाँ यहाँ दी गई हैं:
राजस्थान की वीर धरा पर, एक पिता अपनी बेटी को शस्त्र विद्या का ज्ञान दे रहे हैं।
पिता के सिर पर गर्व से सजी राजपूती पगड़ी और हाथों में चमकती तलवार उनके स्वाभिमान का प्रतीक है।
बेटी, पारंपरिक राजपूती पोशाक में सजी, अपनी आँखों में गजब का साहस और एकाग्रता लिए हुए है।
जब दोनों की तलवारें एक-दूसरे से टकराती हैं, तो उठने वाली खनक महल के प्रांगण में गूँज उठती है।
पिता केवल वार करना नहीं सिखा रहे, बल्कि उसे आत्मरक्षा और धैर्य का पाठ भी पढ़ा रहे हैं।
बेटी की फुर्ती और पैंतरेबाजी को देखकर पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
यह दृश्य दर्शाता है कि राजपूत समाज में बेटियाँ केवल कोमल नहीं, बल्कि रणचंडी का रूप भी होती हैं।
ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी उनके चेहरे पर एक अद्भुत तेज बिखेर रही है।
पिता का मार्गदर्शन और बेटी का अटूट विश्वास इस प्रशिक्षण को और भी खास बना देता है।
यह केवल खेल नहीं, बल्कि अपनी विरासत और शौर्य को अगली पीढ़ी को सौंपने की एक परंपरा है।

JASWANT RATHORE

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