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केववानंद महाराज जी समझाते हैं कि हमारे वस्त्र केवल शरीर को नहीं, मन और संस्कारों को भी दर्शाते हैं।
ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए जिनके दर्शन मात्र से कामुकता और विकार उत्पन्न हों।
मर्यादा, सादगी और शुद्धता ही सच्ची संस्कृति की पहचान है।
इस अमूल्य विचार को सुनें, समझें और जीवन में अपनाएँ।
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