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जापान अब लोगों के कदमों से बिजली बना रहा है
वहाँ की सड़कों और मेट्रो स्टेशनों पर ऐसे स्पेशल टाइल्स लगाए गए हैं जो हर कदम को ऊर्जा में बदल देती हैं
जब कोई उन पर चलता है, तो उसके वजन और मूवमेंट से टाइल्स पर दबाव पड़ता है,
ये टाइल्स हल्का झुकती हैं और अंदर मौजूद पायज़ोइलेक्ट्रिक मटेरियल उस दबाव को बिजली में बदल देता है
हर कदम से थोड़ी-थोड़ी बिजली बनती है, लेकिन जब लाखों लोग एक दिन में चलते हैं, तो वही बिजली मिलकर LED लाइट्स, डिजिटल स्क्रीन और सेंसर तक को चला देती है
टोक्यो के शिबुया स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में, हर दिन लगभग 24 लाख कदम इस सिस्टम को ऊर्जा देते हैं
यह बिजली स्टोर भी की जा सकती है या तुरंत इस्तेमाल भी की जा सकती है
जिससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता घटती है और शहरों को मिलता है एक नया, सस्टेनेबल एनर्जी सोर्स
जापान की ये इनोवेशन दिखाती है कि भविष्य की ऊर्जा हमारे हर कदम के नीचे छिपी है
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1 day ago
भाइयों का प्यार और त्याग
एक गाँव में राम और श्याम नाम के दो भाई रहते थे। दोनों के पास अपनी-अपनी जमीन थी और वे खेती करके अपना गुजारा करते थे। राम शादीशुदा था और उसके बच्चे थे, जबकि श्याम अकेला था।
एक बार फसल की कटाई के बाद, दोनों ने अनाज को बराबर हिस्सों में बाँट लिया और अपने-अपने गोदामों में रख दिया। रात को श्याम ने सोचा, "भैया का परिवार बड़ा है, उन्हें मुझसे ज्यादा अनाज की जरूरत होगी।" वह चुपके से उठा और अपने अनाज के पाँच बोरे भैया के गोदाम में रख आया।
उसी रात राम ने भी सोचा, "श्याम अकेला है, बुढ़ापे में उसका सहारा कौन बनेगा? उसे अभी से ज्यादा धन जोड़ना चाहिए।" राम ने भी चुपके से पाँच बोरे अनाज श्याम के गोदाम में डाल दिए।
अगले दिन दोनों हैरान थे कि अनाज कम क्यों नहीं हुआ! कई दिनों तक यही चलता रहा। एक रात, जब दोनों बोरे लेकर एक-दूसरे के गोदाम की ओर जा रहे थे, तो रास्ते में टकरा गए। सच्चाई सामने आते ही दोनों की आँखों में आँसू आ गए और वे गले लग गए।
कहानी की सीख
सच्चा सुख दूसरों की मदद करने और निस्वार्थ प्रेम में ही छिपा है। जहाँ त्याग है, वहीं शांति है।मूर्ख कौआ और समझदार उल्लू
बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल में एक कौआ और एक उल्लू रहते थे। कौआ स्वभाव से बहुत घमंडी था और खुद को सबसे चतुर समझता था। एक दिन दोपहर की चिलचिलाती धूप में कौए ने उल्लू का मजाक उड़ाते हुए कहा, "दोस्त, तुम दिन भर आँखें बंद करके बैठे रहते हो, क्या तुम्हें सूरज की खूबसूरती नहीं दिखती?"
उल्लू ने शांति से जवाब दिया, "मुझे दिन की रोशनी में धुंधला दिखता है, लेकिन रात के अंधेरे में मैं सब देख सकता हूँ। हर किसी की अपनी खूबी होती है।"
कौए को अपनी काबिलियत पर गुरूर था, उसने उल्लू को चुनौती दी कि वह दिन के उजाले में उड़कर दिखाए। उल्लू मान गया, लेकिन जैसे ही वह उड़ने लगा, तेज धूप के कारण उसे कुछ दिखाई नहीं दिया और वह एक कंटीली झाड़ी में जा गिरा। कौआ जोर-जोर से हंसने लगा।
तभी अचानक एक बाज वहां से गुजरा। कौआ अपनी मस्ती में इतना मशगूल था कि उसने बाज को नहीं देखा। उल्लू ने अपनी तेज सुनने की शक्ति से खतरे को भांप लिया और चिल्लाया, "भागो कौए भाई! ऊपर देखो!"
कौआ तुरंत उड़ गया और उसकी जान बच गई। उसने महसूस किया कि जिसे वह कमजोर समझ रहा था, उसी की सूझबूझ ने आज उसकी जान बचाई है।
सीख: कभी भी किसी की क्षमता का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए, क्योंकि हर किसी के पास अपने अलग गुण होते हैं।


