Você tem 18 anos ou mais?
testing
this is only travel video
4
1
6
mst viedo edit
2
7
jaani 😎😎
gnj
5
3
17
love
0
गीता का पाँचवाँ श्लोक दुर्योधन के कथन के माध्यम से एक गहरा सत्य प्रकट करता है — जहाँ धर्म होता है, वहाँ शक्ति स्वतः प्रकट होती है। पांडवों की ओर से भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य जैसे नहीं, बल्कि ऐसे वीर योद्धा खड़े हैं जो धर्म के लिए युद्ध कर रहे हैं। यह श्लोक हमें सिखाता है कि जब उद्देश्य शुद्ध होता है, तो साधन स्वयं सशक्त हो जाते हैं। जीवन में भी अगर हम सही मार्ग पर खड़े हों, तो विरोध के बीच भी एक अदृश्य बल हमारा साथ देता है। गीता का यह श्लोक हमें आश्वस्त करता है कि धर्म कभी अकेला नहीं होता। अगर आप जीवन में सही के साथ खड़े होने का साहस चाहती हैं, तो यह श्लोक आपके लिए है। 🌿 🙏 धन्यवाद — गीता को ग्रंथ नहीं, मार्गदर्शक मानने के लिए।