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एक गरीब किसान खेत में खड़ा आसमान की तरफ देखता है,
हाथ में हल, पैरों में मिट्टी और दिल में हज़ारों सवाल।
वो भगवान से शिकायत नहीं करता,
बस एक मासूम-सी दुआ करता है —
“हे भगवान! अगर अमीर बना नहीं सकते तो
कम से कम फसल काटने के बाद
कर्ज भी मेरे साथ-साथ खेत में ही दबा देना!”
यह चुटकुला सिर्फ हँसाने के लिए नहीं है,
यह उस किसान की आवाज़ है
जो दिन-रात मेहनत करता है,
फिर भी कर्ज से पीछा नहीं छुड़ा पाता।
🌱 फसल उगती है,
😓 पसीना बहता है,
📄 लेकिन कर्ज की फाइल मोटी होती जाती है।
इस हँसी के पीछे छुपा है
गरीब किसान का संघर्ष,
उसकी मजबूरी और उसकी उम्मीद।
👉 कभी हँसते-हँसते सोचिएगा ज़रूर,
क्योंकि यह मज़ाक नहीं,
सच की हल्की-सी चुभन है।
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