प्रातःकाल की पावन बेला में राधारानी जी के दर्शन करते ही मन भक्तिरस से भर जाता है। मंदिर में घंटियों की मधुर ध्वनि और धूप-दीप की सुगंध वातावरण को दिव्य बना देती है। श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों से सजी राधारानी जी की अलौकिक छवि मन को शांति प्रदान करती है। आरती के समय जब “जय राधे-राधे” का उच्चारण होता है, तो हृदय आनंद से झूम उठता है। भक्त श्रद्धा से हाथ जोड़कर आशीर्वाद की कामना करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो राधारानी जी अपनी करुणा से सभी कष्ट हर लेती हैं और जीवन को प्रेम व भक्ति से भर देती हैं।
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पहले क्या कहावत थी 🤓🥰😄🥳🥳
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dancing
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