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كليبو
भाइयों का प्यार और त्याग
एक गाँव में राम और श्याम नाम के दो भाई रहते थे। दोनों के पास अपनी-अपनी जमीन थी और वे खेती करके अपना गुजारा करते थे। राम शादीशुदा था और उसके बच्चे थे, जबकि श्याम अकेला था।
एक बार फसल की कटाई के बाद, दोनों ने अनाज को बराबर हिस्सों में बाँट लिया और अपने-अपने गोदामों में रख दिया। रात को श्याम ने सोचा, "भैया का परिवार बड़ा है, उन्हें मुझसे ज्यादा अनाज की जरूरत होगी।" वह चुपके से उठा और अपने अनाज के पाँच बोरे भैया के गोदाम में रख आया।
उसी रात राम ने भी सोचा, "श्याम अकेला है, बुढ़ापे में उसका सहारा कौन बनेगा? उसे अभी से ज्यादा धन जोड़ना चाहिए।" राम ने भी चुपके से पाँच बोरे अनाज श्याम के गोदाम में डाल दिए।
अगले दिन दोनों हैरान थे कि अनाज कम क्यों नहीं हुआ! कई दिनों तक यही चलता रहा। एक रात, जब दोनों बोरे लेकर एक-दूसरे के गोदाम की ओर जा रहे थे, तो रास्ते में टकरा गए। सच्चाई सामने आते ही दोनों की आँखों में आँसू आ गए और वे गले लग गए।
कहानी की सीख
सच्चा सुख दूसरों की मदद करने और निस्वार्थ प्रेम में ही छिपा है। जहाँ त्याग है, वहीं शांति है।
শ্রীকৃষ্ণ বাণী মানুষের জীবনের পথপ্রদর্শক। তাঁর বচন শিক্ষা দেয় সাহস, ধৈর্য, সততা ও ভক্তি। তিনি বলেন—অতীত নিয়ে দুঃখ কোরো না, ভবিষ্যৎ নিয়ে ভয় কোরো না; বর্তমানেই করণীয় করো। কর্মই তোমার অধিকার, ফল নয়। যে নিজেকে জেতে, সে-ই সত্যিকারের বিজয়ী। রাগ, লোভ ও অহংকার মানুষকে অন্ধ করে, আর নিঃস্বার্থতা মানুষকে ঈশ্বরের কাছে নিয়ে যায়। শ্রীকৃষ্ণের বাণী মনে করিয়ে দেয়—অন্যের হৃদয় না কষ্ট দিয়ে সৎপথে চলাই জীবনের প্রকৃত ধর্ম।



