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राधा रानी जी के सुबह के दर्शन अत्यंत पावन, शांत और भक्तिमय होते हैं। प्रातःकाल मंदिर में वातावरण शुद्ध और दिव्य ऊर्जा से भर जाता है। मंगल आरती के समय शंख, घंटा और मधुर भजनों की ध्वनि से मन आनंदित हो उठता है। राधा रानी जी को सुंदर वस्त्र, पुष्प और आभूषणों से सजाया जाता है। दीपों की उज्ज्वल ज्योति में उनका श्रीमुख अलौकिक छवि प्रदान करता है। भक्त श्रद्धा और प्रेम से आरती में सम्मिलित होकर अपने जीवन के कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो राधा रानी अपनी करुणा से सबको आशीर्वाद दे रही हों।
बिहार के एक सुनसान गाँव में खड़ा है एक पुराना आम का पेड़, जिसे लोग “कुहासा वाला पेड़” कहते हैं। रात होते ही उसके चारों तरफ़ रहस्यमयी धुंध फैल जाती है—और उसी धुंध में छिपी है एक जली-बुझी आत्मा, जो अपने खोए हुए बच्चे की तलाश में भटकती है। पूजा नाम की लड़की एक रात जब shortcut लेते हुए उस पेड़ के पास पहुँचती है, तो उसे एक ऐसी परछाईं दिखती है जो उसके जीवन का आख़िरी सच बन जाती है। पेड़ के नीचे रोती हुई वह औरत… उसका विकृत चेहरा… और पूजा के बैग में हिलती वह चीज़—सब एक ऐसे रहस्य को उजागर करते हैं, जिसे गाँव वाले आज भी दबाकर रखना चाहते हैं। कहते हैं, जिसने भी उस पेड़ के पास टंगे हिलते बैग को देखा… वह कभी वापस नहीं आया।




