close
testing
Quần short
गीता का पाँचवाँ श्लोक
दुर्योधन के कथन के माध्यम से
एक गहरा सत्य प्रकट करता है —
जहाँ धर्म होता है,
वहाँ शक्ति स्वतः प्रकट होती है।
पांडवों की ओर से
भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य जैसे नहीं,
बल्कि ऐसे वीर योद्धा खड़े हैं
जो धर्म के लिए युद्ध कर रहे हैं।
यह श्लोक हमें सिखाता है कि
जब उद्देश्य शुद्ध होता है,
तो साधन स्वयं सशक्त हो जाते हैं।
जीवन में भी
अगर हम सही मार्ग पर खड़े हों,
तो विरोध के बीच भी
एक अदृश्य बल हमारा साथ देता है।
गीता का यह श्लोक
हमें आश्वस्त करता है कि
धर्म कभी अकेला नहीं होता।
अगर आप जीवन में
सही के साथ खड़े होने का साहस चाहती हैं,
तो यह श्लोक आपके लिए है। 🌿
🙏 धन्यवाद —
गीता को ग्रंथ नहीं,
मार्गदर्शक मानने के लिए।
Bình luận
Cho xem nhiều hơn





