पैसे तो बहुत, पर मेरी सासु माँ के बेटा के पास! यह अभिव्यक्ति पारंपरिक भारतीय समाज में अक्सर देखे जाने वाले एक सामाजिक गतिशीलता पर कटाक्ष करती है या उसका मज़ाक उड़ाती है, जहाँ कभी-कभी परिवार में बेटे (या पति) को, विशेष रूप से उनकी माँ की नज़र में, उनकी पत्नी से अधिक महत्व दिया जाता है, भले ही पत्नी अपने आप में कितनी भी सफल या धनी क्यों न हो।