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हिंदी शायरी
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एक बार एक गरीब बंदर को दावत में खाना नहीं दिया गया, बल्कि उसे मारकर भगा दिया गया। लेकिन उसी अपमान ने उसकी जिंदगी बदल दी। कभी चाय की दुकान पर बर्तन माँजते हुए, कभी समोसे बेचते हुए, दिन-रात कड़ी मेहनत करके वही बंदर एक दिन अपना खुद का रेस्टोरेंट खोलता है। यह कहानी सिखाती है कि 👉 मेहनत कभी अपमानित नहीं होती, बस वक्त लेती है। अगर कहानी पसंद आए तो 👍 Like | 💬 Comment | 🔁 Share जरूर करें