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अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है। राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्जा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे.....भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।
बिहार के एक सुनसान गाँव में खड़ा है एक पुराना आम का पेड़, जिसे लोग “कुहासा वाला पेड़” कहते हैं। रात होते ही उसके चारों तरफ़ रहस्यमयी धुंध फैल जाती है—और उसी धुंध में छिपी है एक जली-बुझी आत्मा, जो अपने खोए हुए बच्चे की तलाश में भटकती है। पूजा नाम की लड़की एक रात जब shortcut लेते हुए उस पेड़ के पास पहुँचती है, तो उसे एक ऐसी परछाईं दिखती है जो उसके जीवन का आख़िरी सच बन जाती है। पेड़ के नीचे रोती हुई वह औरत… उसका विकृत चेहरा… और पूजा के बैग में हिलती वह चीज़—सब एक ऐसे रहस्य को उजागर करते हैं, जिसे गाँव वाले आज भी दबाकर रखना चाहते हैं। कहते हैं, जिसने भी उस पेड़ के पास टंगे हिलते बैग को देखा… वह कभी वापस नहीं आया।


