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Şort
सच्चे शुभचिंतक वो होते हैं जो खामोशी भी समझ लेते हैं, लेकिन यहाँ तो लोग अपनी बात कहने की जल्दी में दूसरों को सुनना ही भूल गए हैं। याद रखिए, बेहतर बोलने के लिए पहले बेहतर सुनना पड़ता है।"👍
"अपनी आवाज़ उतनी ही बुलंद रखें जितना आप दूसरों को सुनने की हिम्मत रखते हैं। सुनना नहीं आता? तो बोलना भी बंद कीजिए।"
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