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वह आत्मा धीरे-धीरे समाधि के पास घुटनों के बल बैठ गयी, ठंडी चट्टान को छूने का प्रयास करते हुए, यह क्षण भावना से भरा हुआ था. जैसे ही उसके स्पर्श ने समाधि से एक संबंध को जगाया, चारों ओर एक अद्भुत रोशनी फैलने लगी, और आत्मा जैसे पहले से अधिक जीवंत और सजीव होने लगी.
आत्मा और आत्मा के परिवार के बीच समझ का एक क्षण साझा हो रहा था, जैसे-जैसे उनका संबंध गहरा होता गया, चारों ओर का जंगल भी इस मिलन की खुशी में जगमगाने लगा. पुराने महल ने जंगल की जगह ले ली उसकी आँखों में आँसू थे, उसने भूली हुई कहानियों और प्रेम के बीच के भार को महसूस किया, आत्मा की रोशनी से घिरे हुए उन्होंने जीवन और परलोक के बीच एक पुल के रूप में अपने हाथों को मिलाने का निरर्थक प्रयास किया ओर वह भारी कदमों से वापस लौट गया