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स्वामी विवेकानंद अपने मित्र के साथ समुद्री जहाज में यात्रा कर रहे थे। हवा से मित्र के हाथ से अखबार उडकर समुद्र में गिर गया। चालक दल के सदस्य ने मित्र को डांटा । विवेकानंद ने तुरंत पेन कागज मांगा और उन्होने विराम चिह्न सहित पूरी तरह याद करके अखबार लिख डाला । चालक दल के सदस्य देखकर दंग रह गए,
भारत सरकार के डेटा के अनुसार एक करोड पुस्तको का अनुवाद करना है लेकिन इस काम को करने वाले कुछ गिने-चुने ही लोग है । उनको भी भारत के लोग ट्रोल करते है। बडे शर्म की बात है।
भगवद्गीता में जीवन के हर प्रश्न का उतर देने वाला ग्रन्थ माना जाता है।
सुधांशु जी इतिहास की घटनाओं से सबक लेने के प्रति आगाह कर रहे हैं कि हमें देश के गद्दारों सै बचकर रहना चाहिए।
मौलाना इंजीनियर मिर्जा
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