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बसंत पंचमी के पावन अवसर पर राधा रानी जी की सुबह के दर्शन अत्यंत मनोहारी और दिव्य होते हैं। इस दिन मंदिर पीले फूलों, वस्त्रों और सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित रहता है। प्रातःकाल मंगल आरती के समय शंख, घंटा और मधुर भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। राधा रानी जी को बसंत ऋतु के अनुरूप पीत वस्त्र धारण कराए जाते हैं, जो प्रेम और आनंद का प्रतीक हैं। दीपों की उज्ज्वल ज्योति में उनका मुखमंडल अलौकिक सौंदर्य से दमक उठता है। भक्तजन श्रद्धा से दर्शन कर राधा रानी की कृपा प्राप्त करते हैं।

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राधा रानी जी के सुबह के दर्शन अत्यंत अलौकिक और मन को शांति देने वाले होते हैं। प्रातःकाल मंदिर में जब मंगल आरती होती है, तब वातावरण भक्तिमय हो जाता है। शंख, घंटा और मृदंग की मधुर ध्वनि से पूरा मंदिर गूंज उठता है। राधा रानी के श्रीविग्रह को सुंदर वस्त्रों, फूलों और आभूषणों से सजाया जाता है। आरती के समय दीपों की ज्योति से उनका मुखमंडल और भी दिव्य प्रतीत होता है। भक्त श्रद्धा और प्रेम से हाथ जोड़कर दर्शन करते हैं। ऐसा लगता है मानो राधा रानी अपनी कृपा दृष्टि से सबके कष्ट हर लेती हैं।

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26 जनवरी की पावन सुबह वृंदावन में श्री राधारानी जी के दर्शन अत्यंत मनोहर और भक्तिमय होते हैं। ठंडी वायु में मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि वातावरण को पवित्र कर देती है। जैसे ही राधारानी जी की मंगला आरती आरंभ होती है, दीपों की उजास में उनका श्रीविग्रह अलौकिक शोभा बिखेरता है। केसरिया, श्वेत और तिरंगे पुष्पों से सजा श्रृंगार विशेष आकर्षण पैदा करता है। भक्तजन हाथ जोड़कर “राधे-राधे” का जाप करते हुए प्रेम, शांति और समर्पण का अनुभव करते हैं। यह दिव्य दर्शन मन, बुद्धि और आत्मा को नई ऊर्जा और भक्ति से भर देता है। 🌸🙏

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