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संध्या समय बरसाना धाम का वातावरण भक्ति और शांति से भर जाता है। मंदिर में घण्टियों की मधुर ध्वनि, शंखनाद और भजन-कीर्तन से चारों ओर दिव्य ऊर्जा फैलती है। राधारानी जी का मनमोहक श्रृंगार, चमकते आभूषण और सुगंधित पुष्पों की माला भक्तों का मन मोह लेती है। दीपों की ज्योति से मंदिर आलोकित हो उठता है। पुजारी श्रद्धा से आरती उतारते हैं और भक्त प्रेमपूर्वक “राधे-राधे” का नाम जपते हैं। उस पावन क्षण में मन को अद्भुत शांति और आनंद की अनुभूति होती है। राधारानी जी के चरणों में समर्पण कर भक्त कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
केववानंद महाराज जी समझाते हैं कि हमारे वस्त्र केवल शरीर को नहीं, मन और संस्कारों को भी दर्शाते हैं।
ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए जिनके दर्शन मात्र से कामुकता और विकार उत्पन्न हों।
मर्यादा, सादगी और शुद्धता ही सच्ची संस्कृति की पहचान है।
इस अमूल्य विचार को सुनें, समझें और जीवन में अपनाएँ।
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