गाँव के बाहर एक पुराना पीपल था। लोग कहते थे, “सूरज ढलते ही उधर मत जाना।” एक रात रामू ने हिम्मत की। जैसे ही वह पेड़ के पास पहुँचा, हवा रुक गई। अचानक पीछे से किसी ने फुसफुसाया— “रामू…” वह पलटा—कोई नहीं। तभी ज़मीन पर उसकी ही परछाईं दिखी… जो हिल नहीं रही थी। डर के मारे वह भागा। सुबह गाँव वालों ने पीपल के नीचे रामू की चप्पलें पाईं। और तब से, हर रात कोई उसी आवाज़ में पुकारता है— “रामू…”