विवादित कानून को लेकर एक बार फिर समाज में चिंता बढ़ रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहले पर्याप्त विरोध न होने के कारण कानून बिना संशोधन लागू हो गया।
अब इसके प्रभावों को देखते हुए एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की जा रही है।