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⁣चालाक चूहा और घमंडी बिल्ली – भाग 2
अनाज की बोरी गिरने के बाद शेरू बिल्ली को अपनी गलती का एहसास हो गया था। वह शर्मिंदा होकर एक कोने में बैठ गई। कुछ देर बाद उसने धीमी आवाज़ में कहा, “चिंटू, आज तुमने मुझे हरा दिया, लेकिन यह सिर्फ किस्मत थी।”
चिंटू मुस्कराया और बोला, “शेरू, यह किस्मत नहीं, समझदारी थी।”

Sharmadeepanshu

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⁣चालाक चूहा और घमंडी बिल्ली – अंतिम भाग
समय के साथ शेरू बिल्ली पूरी तरह बदल चुकी थी। अब उसके मन में घमंड नहीं, बल्कि पछतावा था। एक दिन उसने चिंटू से कहा, “मैंने हमेशा तुम्हें कमजोर समझा, पर असल में कमजोर मेरा अहंकार था।”
चिंटू की आँखों में भी नमी आ गई। उसने पहली बार शेरू में सच्चा बदलाव देखा।

Sharmadeepanshu

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